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महामंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
ऋग्वेद • दीर्घायु व आरोग्य प्रदायक
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
सरल अर्थ: हम त्रिनेत्रधारी (भगवान शिव) की आराधना करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बेल के बंधन से मुक्त हो जाता है, उसी प्रकार हम भी मृत्यु और सांसारिक बंधनों से मुक्त हों, किंतु अमरता से विमुख न हों।
📿 जप संख्या: 108 बार
🪔 माला: रुद्राक्ष माला
⏱️ सर्वश्रेष्ठ समय: प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त)