कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया अमर उपदेश — 18 अध्याय, 700 श्लोक।
मूल संदेश: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
प्रमुख योग: कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, आत्मसंयम योग
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित भक्ति, मर्यादा, प्रेम और नीति का अनुपम महाकाव्य।
सात काण्ड: बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुंदरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड
पाठ लाभ: अखंड मानस पाठ से गृह शांति व भक्ति प्राप्ति
सनातन धर्म के मूल आधारस्तंभ — ऋग्वेद (ज्ञान), यजुर्वेद (कर्म), सामवेद (भक्ति व संगीत), अथर्ववेद (विज्ञान व जीवन)।
महावाक्य: ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’, ‘अहं ब्रह्मास्मि’, ‘तत्त्वमसि’, ‘अयमात्मा ब्रह्म’
ऋचाएं: 20,000+ वैदिक मंत्र व ऋचाएं
महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 प्रमुख पुराण जिनमें सृष्टि उत्पत्ति, वंशावली, देवताओं की लीलाएं और धर्म-नीति का विस्तृत वर्णन है।
प्रमुख पुराण: श्रीमद्भागवत, शिव, विष्णु, गरुड़, मार्कण्डेय, स्कन्द
भागवत महिमा: भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला व भक्ति रस का सागर
वेदों का अंतिम ज्ञान भाग (वेदांत), जहाँ गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष का साक्षात्कार कराया गया है।
दशोपनिषद: ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक
राष्ट्रीय ध्येयवाक्य: ‘सत्यमेव जयते’ मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।
विश्व का सबसे विशाल महाकाव्य, 1 लाख श्लोक, 18 पर्व। ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है।
महत्व: ‘यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्’ — जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।
18 पर्व: आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य आदि
शास्त्रों के अनुसार कुल 18 महापुराण हैं, जिनमें कुल लगभग 4,00,000 (चार लाख) श्लोक हैं। ब्रह्मा, विष्णु, और महेश (त्रिमूर्ति) को 6-6 पुराण समर्पित हैं।
ब्रह्म, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भविष्य, वामन
विष्णु, भागवत, नारद, गरुड़, पद्म, वराह
शिव, लिंग, स्कन्द, अग्नि, मत्स्य, कूर्म
वेदों की 28,000 पांडुलिपियां भंडारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट में सुरक्षित हैं, जिनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियों को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है।
पद्यात्मक, 11,000 मंत्र, 5 शाखाएं (शाकल, बाष्कल, आश्वलायन, शांखायन, माण्डूकायन)। खगोल, विज्ञान व ऋचाएं।
यत् (गतिशील) + जु (आकाश)। यज्ञ विधियां, पूजा विधान, जीवन शैली। दो शाखाएं: शुक्ल यजुर्वेद व कृष्ण यजुर्वेद।
ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप। भारतीय शास्त्रीय संगीत व रागों का मूल उद्गम। 3 शाखाएं: कौथुमीय, राणायनीय, जैमिनीय।
अथर्व = अकंप बुद्धि। आयुर्वेद, जड़ी-बूटी, ब्रह्माण्ड शोध, शांति-पुष्टि कर्म व वैज्ञानिक विद्याओं का अपार भंडार।
उपनिषद भारतीय चिंतन के मूलाधार हैं। गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से निराकार ब्रह्म का साक्षात्कार कराते हैं।
सत्य, जगत, आत्मा और ईश्वर को जानने के 6 शास्त्रीय दृष्टिकोण
प्रकृति और पुरुष (चेतना) के 25 तत्वों का वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण विश्लेषण।
अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) द्वारा चित्तवृत्ति निरोध।
तर्क, प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) और बुद्धि द्वारा सत्य का निर्धारण।
विश्व का प्रथम परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory), 7 पदार्थों व द्रव्य-गुण का विज्ञान।
वैदिक यज्ञ, कर्मकांड, धर्म की व्यवस्था और वेदों की प्रमाणिकता का विवेचन।
‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः’ — आत्मज्ञान और मोक्ष का सर्वोच्च शिखर।