दैनिक पूजा व संध्या वंदन के लिए शुद्ध प्रामाणिक पाठ
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत चार भुजाधारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं। राम नारायणं जानकी वल्लभं॥
कौन कहता है भगवान आते नहीं। तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं॥
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥
सभी प्रमुख देवी-देवताओं की प्रातः व संध्या आरती को शुद्ध हिन्दी अर्थ सहित अपने मोबाइल या कंप्यूटर में सुरक्षित रखें।