सनातन धर्म के पुनरुद्धारक, भारत के चारों कोनों में चार आम्नाय पीठों (मठों) के संस्थापक और ‘अहं ब्रह्मास्मि’ के प्रणेता।
प्रमुख रचनाएं: विवेकचूड़ामणि, सौंदर्य लहरी, भज गोविंदम्, प्रस्थानत्रयी भाष्य
चार मठ: बदरिकाश्रम (उत्तर), श्रृंगेरी (दक्षिण), द्वारका (पश्चिम), पुरी (पूर्व)
महाकाव्य श्री रामचरितमानस और संकटमोचन श्री हनुमान चालीसा के रचयिता, जिन्होंने रामकथा को जन-जन की वाणी बना दिया।
अमर रचनाएं: श्री रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली
सिद्ध दोहा: ‘सिया राम मय सब जग जानी। करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥’
संस्कृत साहित्य के आदिकवि, जिन्होंने प्रथम श्लोक ‘मा निषाद प्रतिष्ठां’ की रचना की और मूल वाल्मीकि रामायण का प्रणयन किया।
अमर ग्रंथ: वाल्मीकि रामायण (24,000 श्लोक, सात काण्ड)
आश्रम: अमृतसर दुर्ग्याणा तीर्थ सरोवर एवं तमसा तट (लव-कुश जन्मभूमि)
काशी के महान संत, जिन्होंने बाह्याडंबरों पर प्रहार कर प्रेम, सत्य, मानवता और अंतरंग भक्ति का सरल मार्ग प्रशस्त किया।
प्रमुख संकलन: बीजक (साखी, सबद, रमैनी)
अमर साखी: ‘पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥’
शिकागो धर्म संसद 1893 में सनातन धर्म का विश्व विजय घोष करने वाले, रामकृष्ण मिशन के संस्थापक महायोगी।
प्रेरणा मंत्र: ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।’
प्रमुख ग्रंथ: राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग
वल्लभ संप्रदाय के पुष्टि मार्ग के अष्टछाप कवियों में शीर्ष, जिन्होंने बालकृष्ण की लीलाओं का अलौकिक व सजीव चित्रण किया।
प्रमुख रचनाएं: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी
अमर पद: ‘मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो। भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो॥’
प्राचीन भारत के ऋषि केवल तपोनिष्ठ संन्यासी ही नहीं, अपितु आयुर्वेद, शल्यक्रिया, परमाणु विज्ञान, खगोल, गणित और विमान शास्त्र के आदि अन्वेषक और वैज्ञानिक थे:
१. महर्षि कश्यप • २. अत्रि • ३. भारद्वाज • ४. विश्वामित्र • ५. गौतम • ६. जमदग्नि • ७. वशिष्ठ
‘चरक संहिता’ के रचयिता। त्रिदोष (वात, पित्त, कफ), पाचन क्रिया (जठराग्नि), रोग प्रतिरोधक क्षमता और आनुवंशिकी के आदि व्याख्याता।
अमर देन: संपूर्ण आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य विज्ञान‘सुश्रुत संहिता’ में १२५ से अधिक शल्य उपकरणों, मोतियाबिंद, पथरी और नाक पुनर्निर्माण (Plastic surgery) का सर्वप्रथम सविस्तार वर्णन।
अमर देन: शल्य क्रिया (Surgery) के विश्व जनकवैशेषिक दर्शन के प्रणेता। जॉन डाल्टन से सहस्रों वर्ष पूर्व सिद्ध किया कि प्रत्येक पदार्थ अविभाज्य ‘परमाणु’ से मिलकर बना है।
अमर देन: परमाणु वाद (Atomic Theory) व गति नियम‘योगसूत्र’ के प्रणेता। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि द्वारा चित्तवृत्ति-निरोध एवं आत्मज्ञान का मार्ग।
अमर देन: वैश्विक योग दर्शन व महाभाष्य‘यंत्र सर्वस्व’ एवं ‘विमान शास्त्र’ के प्रणेता। वायुयान निर्माण, सौर ऊर्जा के उपयोग, विशेष धातुओं और रडार रोधी आवरणों के सूत्र दिए।
अमर देन: विमान तकनीक एवं यंत्र विज्ञान‘शुल्ब सूत्र’ में यज्ञ वेदियों के निर्माण हेतु ज्यामिति और पाइथागोरस से सदियों पूर्व ‘बौधायन प्रमेय’ (कर्ण वर्ग = लम्ब वर्ग + आधार वर्ग) की खोज।
अमर देन: बौधायन प्रमेय, π (पाई) व वर्गमूल गणना‘अगस्त्य संहिता’ में तांबे, जस्ते, पारे और शिखीग्रीवा द्वारा विद्युत बैटरी बनाने और जल के हाइड्रोजन-ऑक्सीजन विघटन की विधि बताई।
अमर देन: विद्युत सेल, समुद्र विज्ञान व दक्षिण वैदिक संस्कृतिप्रकृति और पुरुष के २४ तत्वों से सृष्टि के क्रमिक विकास (Cosmic Evolution) की वैज्ञानिक व्याख्या करने वाले सांख्य दर्शन के संस्थापक।
अमर देन: सांख्य सूत्र एवं सृष्टि विकासवाद