होम › पूजा विधि
• ॐ • वैदिक पद्धति एवं प्रामाणिक विधि-विधान • ॐ •

पूजा विधि संग्रह

घर एवं मंदिर में देवी-देवताओं की षोडशोपचार पूजा, संकल्प, सामग्री सूची और आरती की संपूर्ण सरल विधि

🪔
षोडशोपचार विधान
क्रमबद्ध 16 पावन चरण
📋
सामग्री चेकलिस्ट
पूरी पूजन सामग्री सूची
🙏
संकल्प व क्षमा मंत्र
शुद्ध वैदिक संकल्प विधि
पूजा विधि
🪔

नित्य दैनिक गृह पूजा विधि (सरल पंचोपचार विधान)

प्रतिदिन प्रातःकाल घर के मंदिर में पूजा करने की प्रामाणिक विधि
1. पवित्रता एवं आचमन: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। तांबे के पात्र से तीन बार जल हथेली में लेकर आचमन करें:
“ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः” बोलकर जल पिएं और हाथ धोएं।
2. दीप प्रज्वलन: मंदिर में शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और दीप देवता को प्रणाम करें:
“शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”
3. गणेश वंदना: सर्वप्रथम प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें और उन्हें अक्षत, चंदन व दूर्वा अर्पित करें:
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
4. पंचोपचार अर्पण: गंध (चंदन-रोली), पुष्प (ताजे फूल), धूप (सुगंधित धूप), दीप और नैवेद्य (फल, मिश्री या मिष्ठान) अपने ईष्ट देव को श्रद्धा से अर्पित करें।
5. चालीसा पाठ एवं आरती: अपने ईष्ट देव की चालीसा का पाठ करें, तत्पश्चात खड़े होकर प्रेमपूर्वक आरती गाएं और कर्पूर जलाएं।
6. क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करें:
“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥”

विशेष पर्व एवं व्रत पूजन विधियां

📖

श्री सत्यनारायण व्रत कथा विधि

पूर्णिमा या एकादशी पर भगवान सत्यनारायण के पूजन की सामग्री, पंजीरी प्रसाद, कलश स्थापना व सम्पूर्ण विधि।

🔱

शिव रुद्राभिषेक पूजा विधि

महाशिवरात्रि और सावन सोमवार पर दूध, गंगाजल, शहद व पंचामृत से शिवलिंग के पावन अभिषेक की विधि।

शिव स्तुति पढ़ें →
🪙

दीपावली महालक्ष्मी पूजन विधि

दीपावली प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, श्री गणेश व कुबेर जी की चौकी स्थापना, बहीखाता पूजन व मंत्र विधान।

लक्ष्मी चालीसा पढ़ें →
🪷

नवरात्रि घटस्थापना एवं कलश पूजन

चैत्र व शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन मिट्टी की वेदी पर जौ बोना, कलश स्थापना, अखंड ज्योति व दुर्गा सप्तशती संकल्प।

दुर्गा चालीसा पढ़ें →

✋ सनातन में ‘पंच’ (5) का दिव्य महत्व

  • पंचतत्व: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश (शरीर व ब्रह्मांड के मूल घटक)।
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल (भगवान के अभिषेक का महाप्रसाद)।
  • पंचगव्य: गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोमय (गोबर) — परम शुद्धि कारक।
  • पंचदेव: सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव, विष्णु (सनातन पंचायतन पूजा के आधार)।
  • पंच महायज्ञ: ब्रह्मयज्ञ (अध्ययन), देवयज्ञ (हवन), पितृयज्ञ, मनुष्ययज्ञ (अतिथि सेवा), भूतयज्ञ (जीव सेवा)।

🌈 सनातन में ‘सात’ (7) का दिव्य महत्व

  • सप्तर्षि: कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ।
  • सप्तलोक: भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम्।
  • सप्त सुर: सा, रे, ग, म, प, ध, नि (नाद ब्रह्म का संगीत)।
  • सप्तपुरी (मोक्षदायिनी): अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन), द्वारका।
  • सप्त चिरंजीवी: अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम।
  • सप्त फेरे: गृहस्थ जीवन में 7 जन्मों का पवित्र गठबंधन और 7 पावन वचन।