केवट प्रेम और चरणामृत प्रसंग: जब प्रभु ने मांगी नाव
गंगा पार कराने के लिए केवट ने रखी अनोखी शर्त। उसने कहा—”प्रभु! आपके चरणों की धूल में काठ को नारी बनाने की शक्ति है, पहले चरण धोने दो!”
गंगा पार कराने के लिए केवट ने रखी अनोखी शर्त। उसने कहा—”प्रभु! आपके चरणों की धूल में काठ को नारी बनाने की शक्ति है, पहले चरण धोने दो!”
जब क्षीरसागर मंथन से कालकूट हलाहल विष निकला और तीनों लोक जलने लगे, तब महादेव ने सृष्टि रक्षा हेतु विष को अपने कंठ में धारण किया।
द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने जब अपने दरिद्र सखा सुदामा के आगमन की बात सुनी, तो वे नंगे पांव दौड़ पड़े और आंसुओं से सखा के चरण धोए।
हिरण्यकशिपु के लाख अत्याचारों के बावजूद प्रह्लाद का विश्वास नहीं डोला। भगवान ने भक्त के वचन की रक्षा के लिए खंभा फाड़कर नृसिंह रूप धरा।