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व्रत एवं त्योहार कैलेंडर

वैदिक पंचांग अनुसार एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी, महाशिवरात्रि व समस्त प्रमुख पर्वों की प्रामाणिक तिथियां व कथाएं

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सटीक तिथियां
उदयातिथि व पंचांग सम्मत
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पारण समय
एकादशी व प्रदोष पारण मुहूर्त
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व्रत महात्म्य
पौराणिक कथा व नियम
व्रत एवं त्योहार

🗓️ इस माह के प्रमुख व्रत एवं पावन तिथियां

विक्रम संवत 2083 अनुसार शुद्ध तिथियां

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श्रीहरि विष्णु व्रत

पापमोचिनी एकादशी व्रत

चैत्र मास • कृष्ण पक्ष एकादशी
पारण का शुभ समय
प्रातः 06:12 – 08:35

पापमोचिनी एकादशी के व्रत से मनुष्य के जाने-अनजाने किए गए समस्त पापों का शमन होता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।

🚫 अन्न व चावल का त्याग अनिवार्य
भगवान शिव व्रत

सोम प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि)

त्रयोदशी तिथि • सायं प्रदोष काल
पूजा का शुभ मुहूर्त
सायं 06:22 – 08:44

सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत मानसिक शांति, आरोग्य और सुख-समृद्धि प्रदायक है। सूर्यास्त के समय भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक कर दीपदान करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।

🔱 शिवलिंग पर बेलपत्र व कच्चा दूध अर्पित करें शिव चालीसा पाठ →
विघ्नहर्ता गणेश व्रत

संकष्टी चतुर्थी (अंगारकी चतुर्थी)

कृष्ण पक्ष चतुर्थी • चंद्र दर्शन
चंद्रोदय का अनुमानित समय
रात्रि 09:18 बजे

संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने वाला है। दिनभर उपवास रहकर रात्रि में चंद्रमा को जल का अर्घ्य देकर गणेश जी को मोदक अर्पित करने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है।

🐘 दूर्वा व मोदक का भोग अत्यंत प्रिय गणेश चालीसा पढ़ें →
भारतीय नारी संस्कृति व परंपरा

सौभाग्यवती नारी के १६ पावन शृंगार

पर्वों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में नारी के 16 श्रृंगार केवल सौंदर्य नहीं, अपितु सुख-समृद्धि और आरोग्य के प्रतीक हैं:

१. स्नान: सुगंधित उबटन व पवित्र जल
२. सिन्दूर: अखंड सुहाग का पावन प्रतीक
३. बिंदी: आज्ञा चक्र जागरण व तेज
४. काजल: बुरी दृष्टि से रक्षा व नयन कांति
५. मेहंदी: प्रेम, शीतलता व सौभाग्य रंग
६. लाल वस्त्र: शक्ति, ऊर्जा व मंगलमय परिधान
७. मांगटीका: मस्तक पर संयम व धर्म का तेज
८. नथनी: मान-सम्मान व देवी लक्ष्मी का स्वरूप
९. कर्णफूल / झुमके: श्रवण शुद्धि व सौंदर्य
१०. मंगलसूत्र / हार: हृदय चक्र रक्षा व दांपत्य प्रेम
११. बाजूबंद: बाहुबल, संयम व पारिवारिक सुरक्षा
१२. कंगन / चूड़ियां: रक्त संचार संतुलन व मंगल ध्वनि
१३. आरसी / अंगूठी: आत्म-सम्मान व पवित्रता
१४. कमरबंद: मर्यादा, सुदृढ़ता व स्वावलंबन
१५. पायल / बिछिया: सकारात्मक ऊर्जा व एक्यूप्रेशर
१६. इत्र / सुगंध: सकारात्मकता व दिव्य वातावरण
वैदिक खगोल व पंचांग विज्ञान

१२ हिन्दू मासों का नामकरण कैसे हुआ?

प्रत्येक मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उसी नक्षत्र के नाम पर उस मास का नामकरण हुआ है:

१. चैत्र मास: चित्रा नक्षत्र
२. वैशाख मास: विशाखा नक्षत्र
३. ज्येष्ठ मास: ज्येष्ठा नक्षत्र
४. आषाढ़ मास: पूर्वा/उत्तरा आषाढ़ा
५. श्रावण मास: श्रवण नक्षत्र
६. भाद्रपद मास: पूर्वा/उत्तरा भाद्रपद
७. आश्विन मास: अश्विनी नक्षत्र
८. कार्तिक मास: कृत्तिका नक्षत्र
९. मार्गशीर्ष मास: मृगशिरा नक्षत्र
१०. पौष मास: पुष्य नक्षत्र
११. माघ मास: मघा नक्षत्र
१२. फाल्गुन मास: पूर्वा/उत्तरा फाल्गुनी