पापमोचिनी एकादशी व्रत
चैत्र मास • कृष्ण पक्ष एकादशीपापमोचिनी एकादशी के व्रत से मनुष्य के जाने-अनजाने किए गए समस्त पापों का शमन होता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
विक्रम संवत 2083 अनुसार शुद्ध तिथियां
पापमोचिनी एकादशी के व्रत से मनुष्य के जाने-अनजाने किए गए समस्त पापों का शमन होता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत मानसिक शांति, आरोग्य और सुख-समृद्धि प्रदायक है। सूर्यास्त के समय भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक कर दीपदान करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने वाला है। दिनभर उपवास रहकर रात्रि में चंद्रमा को जल का अर्घ्य देकर गणेश जी को मोदक अर्पित करने के पश्चात व्रत का पारण किया जाता है।
पर्वों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में नारी के 16 श्रृंगार केवल सौंदर्य नहीं, अपितु सुख-समृद्धि और आरोग्य के प्रतीक हैं:
प्रत्येक मास की पूर्णिमा को चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उसी नक्षत्र के नाम पर उस मास का नामकरण हुआ है: