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श्री हनुमान चालीसा गूढ़ रहस्य

अष्ट सिद्धियां एवं नौ निधियां

“अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥”

माता जानकी ने लंका में श्री हनुमान जी की अनन्य निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें समस्त 8 सिद्धियों और 9 निधियों का स्वामी व दाता होने का अमर वरदान दिया था।

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आठ अलौकिक सिद्धियां (Ashta Siddhis)

१. अणिमा (Anima) अतिसूक्ष्म

शरीर को अणु (परमाणु) के समान सूक्ष्म कर लेना। लंका में प्रवेश हेतु हनुमान जी ने ‘मसक समान रूप’ धारण किया था।

२. महिमा (Mahima) विशालकाय

शरीर को पर्वताकार और असीम विस्तार देना। सुरसा के मुख के सम्मुख हनुमान जी ने अपने शरीर को सौ योजन तक विस्तृत किया था।

३. गरिमा (Garima) अत्यंत भारी

शरीर को इतना भारी बना लेना जिसे त्रिलोकी की कोई शक्ति हिला न सके। महाभारत में महाबली भीम भी हनुमान जी की पूंछ न उठा सके थे।

४. लघिमा (Laghima) अतिहल्का

शरीर को रुई अथवा वायु से भी हल्का कर लेना, जिससे जल की सतह या आकाश में वायुवत सहज विचरण किया जा सके।

५. प्राप्ति (Prapti) इच्छित लाभ

बिना किसी बाधा के किसी भी स्थान, लोक या अदृश्य वस्तु को तत्काल प्राप्त करने और पशु-पक्षियों की भाषा समझने की सामर्थ्य।

६. प्रकाम्य (Prakamya) अबाध गति

पृथ्वी, पाताल, जल अथवा आकाश में बिना अवरोध विचरण करना, जल पर थलवत चलना और इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करना।

७. ईशित्व (Ishitwa) प्रभुत्व

समस्त चराचर जगत, जीवों, तत्वों और पदार्थों पर ईश्वरतुल्य आधिपत्य, शासन और सृष्टि के नियमों को संचालित करने की शक्ति।

८. वशित्व (Vashitwa) वशीकरण

प्रत्येक प्राणी, परिस्थिति और विरोधी शक्तियों को अपने वशीभूत और अनुकूल कर लेना। इंद्रियों और मन पर पूर्ण विजय।

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कुबेर की नौ पावन निधियां (Nav Nidhis)

१. पद्म निधि सात्विक गुणों, स्वर्ण-रजत और धर्म की अक्षय संपत्ति।
२. महापद्म निधि अतुलनीय दान व पीढ़ियों तक चलने वाली अखंड संपन्नता।
३. शंख निधि उत्तम भोजन, सुंदर वस्त्र, संगीत, कला व ऐश्वर्य सुख।
४. मकर निधि शस्त्रास्त्र, सैन्य प्रभाव, वीरता, राज्य कृपा व सुरक्षा।
५. कच्छप निधि कछुए समान शांत, सुदीर्घ व गुप्त संचित धन सुरक्षा।
६. मुकुंद निधि कुशाग्र बुद्धि, सूक्ष्म कला, सौंदर्य व निरंतर प्रसन्न चित्त।
७. कुंद निधि व्यापार विस्तार, आभूषण व मित्रों में मधुर संबंध।
८. नील निधि रत्न, नीलम, कृषि उपज, खनिज एवं वस्त्र-उद्योग लाभ।
९. खर्व निधि संतुलित संपत्ति जो साधक में विनम्रता बनाए रखे।