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नित्य दैनिक गृह पूजा विधि (सरल पंचोपचार विधान)
प्रतिदिन प्रातःकाल घर के मंदिर में पूजा करने की प्रामाणिक विधि
1. पवित्रता एवं आचमन: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। कुश या ऊन के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। तांबे के पात्र से तीन बार जल हथेली में लेकर आचमन करें:
“ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः” बोलकर जल पिएं और हाथ धोएं।
“ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः” बोलकर जल पिएं और हाथ धोएं।
2. दीप प्रज्वलन: मंदिर में शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और दीप देवता को प्रणाम करें:
“शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”
“शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”
3. गणेश वंदना: सर्वप्रथम प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें और उन्हें अक्षत, चंदन व दूर्वा अर्पित करें:
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
4. पंचोपचार अर्पण: गंध (चंदन-रोली), पुष्प (ताजे फूल), धूप (सुगंधित धूप), दीप और नैवेद्य (फल, मिश्री या मिष्ठान) अपने ईष्ट देव को श्रद्धा से अर्पित करें।
5. चालीसा पाठ एवं आरती: अपने ईष्ट देव की चालीसा का पाठ करें, तत्पश्चात खड़े होकर प्रेमपूर्वक आरती गाएं और कर्पूर जलाएं।
6. क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करें:
“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥”
“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥”