होम › आध्यात्मिक व वैदिक टूल्स
• ॐ • दैनिक साधना, शुभ मुहूर्त एवं वैदिक गणना • ॐ •

आध्यात्मिक व वैदिक टूल्स

घर बैठे दैनिक मंत्र साधना, १०८ मनकों की डिजिटल जप माला, शुभ चौघड़िया मुहूर्त, राहुकाल एवं वैदिक गणनाओं के लिए उपयोगी साधन

📿
डिजिटल जप माला
१०८ मनके काउंटर
⏳
चौघड़िया मुहूर्त
अमृत, शुभ, लाभ वेला
🔔
मंत्र जप टाइमर
एकाग्र साधना हेतु
लाइव टूल

डिजिटल जप माला काउंटर

०
/ १०८ मनके
प्रत्येक जप पर बटन दबाएं अथवा स्क्रीन पर टैप करें।

🛠️ सभी वैदिक व आध्यात्मिक टूल्स

आपकी दैनिक साधना व पूजा-पाठ को सुगम बनाने वाले साधन

📿

डिजिटल जप माला काउंटर

१०८ मनकों की वैदिक माला। महामृत्युंजय, गायत्री या किसी भी इष्ट मंत्र के नियमित जप का हिसाब रखें।

ऊपर लाइव उपयोग करें ↑
⏳

आज का चौघड़िया मुहूर्त

दिन एवं रात्रि के शुभ चौघड़िया (उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग) जानकर कोई भी नया कार्य आरंभ करें।

पंचांग में मुहूर्त देखें →
🪐

दैनिक राशिफल कैलकुलेटर

अपनी जन्म राशि अथवा नाम अक्षर अनुसार आज का सटीक भविष्यफल, शुभ रंग, लकी नंबर एवं अचूक उपाय जानें।

राशिफल देखें →
📖

सम्पूर्ण चालीसा संग्रह

हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, दुर्गा चालीसा, गणेश चालीसा, लक्ष्मी चालीसा सहित समस्त चालीसा ऑडियो व अर्थ सहित।

चालीसा संग्रह खोलें →
🕉️

वैदिक मंत्र व स्तोत्र संग्रह

शुद्ध संस्कृत उच्चारण, सही दिशा, आसन और जप विधि के ५ स्वर्णिम नियमों के साथ प्रभावशाली मंत्र संग्रह।

मंत्र संग्रह देखें →
🪔

षोडशोपचार पूजा विधि गाइड

दैनिक पंचोपचार एवं विशेष पर्वों पर १६ चरणों की सम्पूर्ण वैदिक पूजा विधि, संकल्प मंत्र व सामग्री चेकलिस्ट।

पूजा विधि देखें →
• सनातन जीवन दर्शन • वैदिक मर्यादाएं •

सनातन धर्म के १६ पावन संस्कार (16 Vedic Sanskars)

वेदों और स्मृतियों के अनुसार मानव जीवन को संस्कारवान, सात्विक एवं मोक्षगामी बनाने के लिए गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि तक १६ पवित्र संस्कारों का विधान है:

१. गर्भाधान संस्कार

श्रेष्ठ, चरित्रवान और धर्मपरायण संतान की प्राप्ति हेतु संकल्पपूर्वक प्रथम मिलन।

२. पुंसवन संस्कार

गर्भस्थ शिशु के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य रक्षा हेतु तीसरे माह में वैदिक आहुति।

३. सीमन्तोन्नयन संस्कार

गर्भवती माता को मानसिक प्रसन्नता व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना (६ठे/८वें माह)।

४. जातकर्म संस्कार

जन्म लेते ही स्वर्ण शलाका से जीभ पर मधु-घृत से ‘ॐ’ लिखकर मेधा-दीर्घायु प्रार्थना।

५. नामकरण संस्कार

नक्षत्र व राशि अनुसार शिशु का सार्थक, गुणवाचक व कल्याणकारी नाम रखना (११वें/१२वें दिन)।

६. निष्क्रमण संस्कार

शिशु को प्रथम बार घर से बाहर प्रकृति, सूर्यदेव व चन्द्रदेव के दर्शन कराना (चौथे माह)।

७. अन्नप्राशन संस्कार

शिशु को प्रथम बार सात्विक ठोस अन्न (खीर/दलिया) चांदी के चम्मच से चखाना (६ठे माह)।

८. चूड़ाकर्म (मुंडन)

गर्भकालीन अशुद्ध केशों का त्याग, मस्तिष्क की नसों में रक्त संचार तेज करना (१ले/३रे वर्ष)।

९. कर्णवेध संस्कार

कानों का भेदन ताकि एक्यूप्रेशर द्वारा श्रवण शक्ति तीक्ष्ण रहे व स्वास्थ्य रक्षा हो।

१०. उपनयन (यज्ञोपवीत)

पवित्र जनेऊ धारण, गायत्री मंत्र दीक्षा एवं आध्यात्मिक दूसरा जन्म (‘द्विज’ पद)।

११. वेदारंभ संस्कार

गुरुकुल में वेदों, उपनिषदों और सनातन शास्त्रों का विधिवत अध्ययन आरंभ करना।

१२. केशांत (गोदान) संस्कार

युवावस्था में प्रवेश पर दाढ़ी-मूंछ का प्रथम मुंडन, ब्रह्मचर्य अनुशासन व गुरु को गोदान।

१३. समावर्तन (दीक्षांत)

शिक्षा पूर्णता पर गुरुकुल से विदाई स्नान, ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ की अंतिम अमर सीख।

१४. विवाह संस्कार

सप्तपदी (सात फेरे), पाणिग्रहण एवं धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष सिद्धि हेतु पवित्र युगल मिलन।

१५. वानप्रस्थ / संन्यास

गृहस्थ दायित्वों को भावी पीढ़ी को सौंपकर समाज सेवा, तीर्थाटन व आत्म-कल्याण।

१६. अन्त्येष्टि संस्कार

पवित्र अग्नि में शरीर का विसर्जन, पंचतत्वों का विलय एवं जीवात्मा के मोक्ष की प्रार्थना।