आपकी दैनिक साधना व पूजा-पाठ को सुगम बनाने वाले साधन
१०८ मनकों की वैदिक माला। महामृत्युंजय, गायत्री या किसी भी इष्ट मंत्र के नियमित जप का हिसाब रखें।
ऊपर लाइव उपयोग करें ↑दिन एवं रात्रि के शुभ चौघड़िया (उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग) जानकर कोई भी नया कार्य आरंभ करें।
पंचांग में मुहूर्त देखें →अपनी जन्म राशि अथवा नाम अक्षर अनुसार आज का सटीक भविष्यफल, शुभ रंग, लकी नंबर एवं अचूक उपाय जानें।
राशिफल देखें →हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, दुर्गा चालीसा, गणेश चालीसा, लक्ष्मी चालीसा सहित समस्त चालीसा ऑडियो व अर्थ सहित।
चालीसा संग्रह खोलें →शुद्ध संस्कृत उच्चारण, सही दिशा, आसन और जप विधि के ५ स्वर्णिम नियमों के साथ प्रभावशाली मंत्र संग्रह।
मंत्र संग्रह देखें →दैनिक पंचोपचार एवं विशेष पर्वों पर १६ चरणों की सम्पूर्ण वैदिक पूजा विधि, संकल्प मंत्र व सामग्री चेकलिस्ट।
पूजा विधि देखें →वेदों और स्मृतियों के अनुसार मानव जीवन को संस्कारवान, सात्विक एवं मोक्षगामी बनाने के लिए गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि तक १६ पवित्र संस्कारों का विधान है:
श्रेष्ठ, चरित्रवान और धर्मपरायण संतान की प्राप्ति हेतु संकल्पपूर्वक प्रथम मिलन।
गर्भस्थ शिशु के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य रक्षा हेतु तीसरे माह में वैदिक आहुति।
गर्भवती माता को मानसिक प्रसन्नता व सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना (६ठे/८वें माह)।
जन्म लेते ही स्वर्ण शलाका से जीभ पर मधु-घृत से ‘ॐ’ लिखकर मेधा-दीर्घायु प्रार्थना।
नक्षत्र व राशि अनुसार शिशु का सार्थक, गुणवाचक व कल्याणकारी नाम रखना (११वें/१२वें दिन)।
शिशु को प्रथम बार घर से बाहर प्रकृति, सूर्यदेव व चन्द्रदेव के दर्शन कराना (चौथे माह)।
शिशु को प्रथम बार सात्विक ठोस अन्न (खीर/दलिया) चांदी के चम्मच से चखाना (६ठे माह)।
गर्भकालीन अशुद्ध केशों का त्याग, मस्तिष्क की नसों में रक्त संचार तेज करना (१ले/३रे वर्ष)।
कानों का भेदन ताकि एक्यूप्रेशर द्वारा श्रवण शक्ति तीक्ष्ण रहे व स्वास्थ्य रक्षा हो।
पवित्र जनेऊ धारण, गायत्री मंत्र दीक्षा एवं आध्यात्मिक दूसरा जन्म (‘द्विज’ पद)।
गुरुकुल में वेदों, उपनिषदों और सनातन शास्त्रों का विधिवत अध्ययन आरंभ करना।
युवावस्था में प्रवेश पर दाढ़ी-मूंछ का प्रथम मुंडन, ब्रह्मचर्य अनुशासन व गुरु को गोदान।
शिक्षा पूर्णता पर गुरुकुल से विदाई स्नान, ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ की अंतिम अमर सीख।
सप्तपदी (सात फेरे), पाणिग्रहण एवं धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष सिद्धि हेतु पवित्र युगल मिलन।
गृहस्थ दायित्वों को भावी पीढ़ी को सौंपकर समाज सेवा, तीर्थाटन व आत्म-कल्याण।
पवित्र अग्नि में शरीर का विसर्जन, पंचतत्वों का विलय एवं जीवात्मा के मोक्ष की प्रार्थना।