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सनातन धर्म के पवित्र धर्मग्रंथ

अपौरुषेय वेद, ज्ञान-शिरोमणि उपनिषद, अमर गीता और 18 महापुराणों का शास्त्रीय परिचय एवं सनातन संदेश।

📖 प्रस्थानत्रयी • योगशास्त्र

श्रीमद्भगवद् गीता

कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया अमर उपदेश — 18 अध्याय, 700 श्लोक।

मूल संदेश: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

प्रमुख योग: कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, आत्मसंयम योग

📜 अवधी महाकाव्य • सात काण्ड

श्री रामचरितमानस

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित भक्ति, मर्यादा, प्रेम और नीति का अनुपम महाकाव्य।

सात काण्ड: बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुंदरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड

पाठ लाभ: अखंड मानस पाठ से गृह शांति व भक्ति प्राप्ति

🕉️ अपौरुषेय श्रुति • ज्ञानमूल

चतुर्वेद (चारों वेद)

सनातन धर्म के मूल आधारस्तंभ — ऋग्वेद (ज्ञान), यजुर्वेद (कर्म), सामवेद (भक्ति व संगीत), अथर्ववेद (विज्ञान व जीवन)।

महावाक्य: ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’, ‘अहं ब्रह्मास्मि’, ‘तत्त्वमसि’, ‘अयमात्मा ब्रह्म’

ऋचाएं: 20,000+ वैदिक मंत्र व ऋचाएं

वैदिक मंत्र संग्रह देखें →
🏛️ अष्टादश पुराण • महर्षि व्यास

18 महापुराण

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 प्रमुख पुराण जिनमें सृष्टि उत्पत्ति, वंशावली, देवताओं की लीलाएं और धर्म-नीति का विस्तृत वर्णन है।

प्रमुख पुराण: श्रीमद्भागवत, शिव, विष्णु, गरुड़, मार्कण्डेय, स्कन्द

भागवत महिमा: भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला व भक्ति रस का सागर

18 महापुराण संपूर्ण सूची देखें ↓
☀️ वेदांत दर्शन • 108 उपनिषद

प्रमुख उपनिषद

वेदों का अंतिम ज्ञान भाग (वेदांत), जहाँ गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष का साक्षात्कार कराया गया है।

दशोपनिषद: ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक

राष्ट्रीय ध्येयवाक्य: ‘सत्यमेव जयते’ मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।

उपनिषद ज्ञान व वर्गीकरण देखें ↓
🛡️ पंचम वेद • इतिहास

महाभारत (जय संहिता)

विश्व का सबसे विशाल महाकाव्य, 1 लाख श्लोक, 18 पर्व। ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है।

महत्व: ‘यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्’ — जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।

18 पर्व: आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य आदि

महाभारत कथाएं देखें →
• श्री दुर्ग्याणा तीर्थ अमृतसर शिलालेख प्रामाणिक ज्ञान •

महर्षि वेदव्यास रचित 18 महापुराण (सम्पूर्ण परिचय व श्लोक संख्या)

शास्त्रों के अनुसार कुल 18 महापुराण हैं, जिनमें कुल लगभग 4,00,000 (चार लाख) श्लोक हैं। ब्रह्मा, विष्णु, और महेश (त्रिमूर्ति) को 6-6 पुराण समर्पित हैं।

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ब्रह्म पुराण (6 पुराण)

ब्रह्म, ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भविष्य, वामन

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विष्णु पुराण (6 पुराण)

विष्णु, भागवत, नारद, गरुड़, पद्म, वराह

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शिव पुराण (6 पुराण)

शिव, लिंग, स्कन्द, अग्नि, मत्स्य, कूर्म

क्र. पुराण का नाम श्लोक संख्या समर्पित देव मुख्य विषय एवं शास्त्रीय महत्व
1 ब्रह्म पुराण 14,000 ब्रह्मा जी सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा अवतरण, रामायण और कृष्णावतार की कथाएं। इसे ‘आदि पुराण’ भी कहते हैं।
2 पद्म पुराण 55,000 विष्णु जी पृथ्वी, आकाश तथा नक्षत्रों की उत्पत्ति का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक वर्णन। 55 हजार श्लोकों का विशाल ज्ञान।
3 विष्णु पुराण 23,000 विष्णु जी भारत की राष्ट्रीय व भौगोलिक पहचान का अमर श्लोक: “उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।”
4 शिव पुराण 24,000 शिव जी भगवान शिव की अलौकिक महिमा, कैलाश पर्वत, शिवलिंग पूजा रहस्य, भस्म और रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व।
5 श्रीमद्भागवत पुराण 18,000 विष्णु जी भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की शिरोमणि; 12 स्कंध, भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाएं तथा मोक्ष का मार्ग।
6 नारद पुराण 25,000 विष्णु जी वैदिक मंत्र, मृत्यु पश्चात के क्रम, गंगा अवतरण एवं संगीत-शिक्षा का ज्ञान, जो आज भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल आधार है।
7 मार्कण्डेय पुराण 9,000 ब्रह्मा जी सामाजिक न्याय व योग पर ऋषि मार्कण्डेय और ऋषि जैमिनि का संवाद। इसी पुराण का अंश ‘श्री दुर्गा सप्तशती’ है।
8 अग्नि पुराण 15,000 शिव जी भारतीय संस्कृति व विद्याओं का विश्वकोश (Encyclopedia); मत्स्यावतार, रामायण, महाभारत, व्याकरण, आयुर्वेद व धनुर्वेद।
9 भविष्य पुराण 28,000 ब्रह्मा जी भगवान सूर्य का महत्व, 12 महीनों का विधान, भविष्य की घटनाएं और प्रसिद्ध श्री सत्यनारायण भगवान की व्रत कथा।
10 ब्रह्मवैवर्त पुराण 18,000 ब्रह्मा जी ब्रह्मा, गणेश, तुलसी, सावित्री, लक्ष्मी, सरस्वती तथा भगवान श्रीकृष्ण व राधा रानी की सर्वोच्च लीलाओं का दर्शन।
11 लिंग पुराण 11,000 शिव जी सृष्टि की उत्पत्ति, खगोलीय कालक्रम (युग, मन्वंतर, कल्प), ज्योतिर्लिंग प्राकट्य, अघोर मंत्र व शिव उपासना की शिक्षा।
12 वराह पुराण 10,000 विष्णु जी वराह अवतार कथा, भगवद्गीता माहात्म्य, स्वर्ग-पाताल लोक दर्शन, श्राद्ध पद्धति, उत्तरायण-दक्षिणायन, अमावस्या व पूर्णिमा।
13 स्कन्द पुराण 81,000 शिव जी सर्वाधिक विशाल पुराण; भारत का भौगोलिक वर्णन, 27 नक्षत्र, 18 पावन नदियां, 12 ज्योतिर्लिंग व गंगा अवतरण।
14 वामन पुराण 10,000 ब्रह्मा जी भगवान वामन का बाल्यकाल व अवतार कथा, 7 द्वीप, पृथ्वी, पर्वत, पवित्र नदियां तथा भारतवर्ष के खण्डों का वर्णन।
15 कूर्म पुराण 18,000 शिव जी चारों वेदों का सार, कूर्म अवतार, समुद्र मंथन, ब्रह्मा-विष्णु-महेश एकात्मता, चारों युग और 4 आश्रम व्यवस्था।
16 मत्स्य पुराण 14,000 शिव जी मत्स्य अवतार कथा, जल प्रलय, सृष्टि उत्पत्ति, सौरमण्डल के सभी ग्रह, चारों युग और चन्द्रवंशी राजाओं का प्राचीन इतिहास।
17 गरुड़ पुराण 18,000 विष्णु जी मृत्यु पश्चात जीवात्मा की गति, यमलोक, प्रेतलोक, नरक यातनाएं और 84 लाख योनियों का रहस्य। (सद्गति हेतु पाठ का विधान)।
18 ब्रह्माण्ड पुराण 12,000 ब्रह्मा जी सूर्यवंशी व चन्द्रवंशी राजाओं का इतिहास, 7 कल्प/मन्वंतर, भगवान परशुराम कथा। यह विश्व का प्रथम खगोल शास्त्र माना जाता है। ‘ललिता सहस्रनाम’ इसी में है।
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चतुर्वेद (संसार के प्रथम ग्रंथ)

पुणे भंडारकर इंस्टीट्यूट • UNESCO धरोहर

वेदों की 28,000 पांडुलिपियां भंडारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट में सुरक्षित हैं, जिनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियों को यूनेस्को ने विश्व विरासत सूची में शामिल किया है।

1. ऋग्वेद (ज्ञान व स्थिति)

पद्यात्मक, 11,000 मंत्र, 5 शाखाएं (शाकल, बाष्कल, आश्वलायन, शांखायन, माण्डूकायन)। खगोल, विज्ञान व ऋचाएं।

2. यजुर्वेद (श्रेष्ठतम कर्म)

यत् (गतिशील) + जु (आकाश)। यज्ञ विधियां, पूजा विधान, जीवन शैली। दो शाखाएं: शुक्ल यजुर्वेद व कृष्ण यजुर्वेद।

3. सामवेद (संगीत व उपासना)

ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप। भारतीय शास्त्रीय संगीत व रागों का मूल उद्गम। 3 शाखाएं: कौथुमीय, राणायनीय, जैमिनीय।

4. अथर्ववेद (अकंपन व रहस्य विद्या)

अथर्व = अकंप बुद्धि। आयुर्वेद, जड़ी-बूटी, ब्रह्माण्ड शोध, शांति-पुष्टि कर्म व वैज्ञानिक विद्याओं का अपार भंडार।

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उपनिषद (वेदान्त दर्शन)

कुल 108 उपनिषद • 10 मुख्य उपनिषद

उपनिषद भारतीय चिंतन के मूलाधार हैं। गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से निराकार ब्रह्म का साक्षात्कार कराते हैं।

ऋग्वेदीय: 10 उपनिषद
शुक्ल यजुर्वेदीय: 19 उपनिषद
कृष्ण यजुर्वेदीय: 32 उपनिषद
सामवेदीय: 16 उपनिषद
अथर्ववेदीय: 31 उपनिषद (कुल = 108 उपनिषद)

आदि शंकराचार्य भाष्यकृत 10 प्रमुख उपनिषद:

1. ईशावास्य 2. केन 3. कठ (नचिकेता) 4. प्रश्न 5. मुण्डक (सत्यमेव जयते) 6. माण्डूक्य (12 श्लोक) 7. तैत्तिरीय 8. ऐतरेय 9. श्वेताश्वतर 10. छान्दोग्य 11. बृहदारण्यक
• सनातन मेधा •

हिन्दू दर्शन परंपरा (षड्दर्शन)

सत्य, जगत, आत्मा और ईश्वर को जानने के 6 शास्त्रीय दृष्टिकोण

महर्षि कपिल

1. सांख्य दर्शन

प्रकृति और पुरुष (चेतना) के 25 तत्वों का वैज्ञानिक व तर्कपूर्ण विश्लेषण।

महर्षि पतंजलि

2. योग दर्शन

अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) द्वारा चित्तवृत्ति निरोध।

महर्षि गौतम

3. न्याय दर्शन

तर्क, प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) और बुद्धि द्वारा सत्य का निर्धारण।

महर्षि कणाद

4. वैशेषिक दर्शन

विश्व का प्रथम परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory), 7 पदार्थों व द्रव्य-गुण का विज्ञान।

महर्षि जैमिनि

5. पूर्व मीमांसा

वैदिक यज्ञ, कर्मकांड, धर्म की व्यवस्था और वेदों की प्रमाणिकता का विवेचन।

महर्षि बादरायण (व्यास)

6. उत्तर मीमांसा (वेदान्त)

‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः’ — आत्मज्ञान और मोक्ष का सर्वोच्च शिखर।